मिट्टी के बर्तन की खोज से पता चला कि इज़राइल में 8,000 साल पहले जैतून का तेल इस्तेमाल किया जाता था।

नए साक्ष्यों से पता चलता है कि जैतून का तेल इज़राइल और संभवतः भूमध्यसागरीय क्षेत्र में लगभग 8,000 साल पहले से ही इस्तेमाल किया जाता था।

नए शोध से यह साक्ष्य मिला है कि जैतून का तेल इज़राइल और संभवतः भूमध्यसागरीय क्षेत्र में 8,000 साल पहले से ही इस्तेमाल किया जाता था।

24 नवंबर को इज़राइल जर्नल ऑफ प्लांट साइंसेज में प्रकाशित एक अध्ययन ने लोअर गैलीली के एन ज़िपोरी में 2011 और 2013 के बीच खुदाई के दौरान मिले मिट्टी के बर्तनों पर किए गए परीक्षणों के परिणामों का खुलासा किया।

यरूशलेम की हिब्रू यूनिवर्सिटी और इज़राइल पुरातत्व प्राधिकरण के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों के नमूनों का जैविक अवशेष विश्लेषण करने के लिए उनका उपयोग किया और उनमें जैतून के तेल के अंश पाए। परीक्षणों से यह भी पता चला कि यहां पाए गए कुछ मिट्टी के बर्तन ईसा पूर्व 5,800 के हैं और उनका उपयोग जैतून के तेल के भंडारण के लिए किया जाता था।

ये निष्कर्ष, इज़राइल के तट पर स्थित कफ़र समीर के डूबे हुए स्थल पर मिले निष्कर्षों के साथ, जहाँ कुचले हुए जैतून के पत्थर और जैतून का गूदा गड्ढों में दबे हुए पाए गए थे, इज़राइल और संभवतः पूरे भूमध्यसागरीय क्षेत्र में जैतून के तेल के बड़े पैमाने पर उत्पादन और खपत के सबसे शुरुआती सबूत प्रदान करते हैं।

जहाँ एक ओर कफ़र समीर अध्ययन ने अनुमान लगाया कि इस क्षेत्र में 6,500 साल पहले जैतून का तेल बनाया जाता था, वहीं एन ज़िपोरी में मिली मिट्टी के बर्तनों का 5,800 ईसा पूर्व का होना यह दर्शाता है कि जैतून के तेल का उत्पादन और खपत लगभग 8,000 साल पुराना हो सकता है।

यह दर्शाता है कि उस समय इस क्षेत्र में जैतून का तेल आहार का एक मुख्य हिस्सा था, लेकिन शोधकर्ताओं का यह भी अनुमान है कि इसका उपयोग तेल के दीयों में ईंधन के रूप में भी किया गया होगा।